भाग १ का सिलसिला पिछले भाग में हमने कवच पहने रहने के कुछ कारण देखे और कवच के २ हत्यारों में बारे में सीखे थे, यहाँ हम उसका अगला भाग सीखेंगे। ३. विश्वास की ढाल - युद्ध में ढाल एक ऐसा हत्यार है, जिस के उपयोग से, वार किया जाने वाले सारे हत्यारों के हानी से एक योद्धा बचता है, यदि सही दिशा में उसे फेरते है। उसी प्रकार, हमारे मसीह जीवन में विश्वास एक ढाल के समान है, जो शैतान के हर प्रकार के वार से हमें बचाता है। उसे सही तरीके से इस्तेमाल करने हम वचन से सीखे, अर्थात् हमें कभी और कहाँ अपने ज़बान से विश्वास के वचन बोलकर हमारे मुसीबतों पर विजय पाना है, इसका हमें फैसला लेना है। निराशा, हार, दुखी वचनों को त्यागना है, और जीवन के वचन हमारे होठो से हमें बोलना है। ४. कमर पर सत्य का फेंटा: कवच के बारे में लिखने पर, सबसे पहले बताया हुवा हत्यार है - सत्य का फेंटा, जिससे हम यह सीखते है, कि सत्य ही हमें स्तिर रख सकती है। अटल खड़े रहने के लिए, हमें सत्य को थामे रहना ज़रूरी है। हमारी जान जाए तब भी हमें सत्य को पकडे रखना है, वह चाहे वचन की सच्चाई हो, या जीवन की सच्चाई हो, या एतियासिक सच्चाई ...